त्वं देवि सरस्वत्यवा
त्वं देवि सरस्वत्यवा वाजेषु वाजिनि। रदा पूषेव नः सनिम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे दिव्य सरस्वती! अन्न एवं शक्ति से संपन्न तुम संग्रामों (बौद्धिक या भौतिक) में हमारी रक्षा करो और पूषा देवता के समान हमें धन-संपत्ति (ज्ञान रूपी) प्रदान करो।
इस मंत्र से क्या होगा?
विवादों (शास्त्रार्थ) में विजय और बौद्धिक संघर्षों में सफलता
विस्तृत लाभ
विवादों (शास्त्रार्थ) में विजय और बौद्धिक संघर्षों में सफलता।
जप काल
शास्त्रार्थ, वाद-विवाद प्रतियोगिता या परीक्षा से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सत्यसङ्कल्पाय नमः
ॐ भर्गाय नमः
ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ।
ॐ जङ्घे पातु धराभारहर्ता योऽसौ नृकेसरी
मदोन्मदातियौवने प्रमोदमानमण्डिते प्रियानुरागरञ्जिते कलाविलासपण्डिते। अनन्यधन्यकुञ्जराज्यकामकेलिकोविदे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ शूराय नमः