शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ विरूपाक्षाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र (Nama-Mantras)।
स्वरूपत्रिनेत्रधारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके पास अद्भुत/विचित्र (तीसरा) नेत्र है 61।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अतीन्द्रिय दृष्टि का विकास
विस्तृत लाभ
अतीन्द्रिय दृष्टि का विकास
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वेदमन्त्राभिषेचिताय नमः
ॐ धनागारं धनेश्वरी पातु।
ॐ अमृतोद्भवायै नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ विजितेन्द्रियाय नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥