शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ अच्युताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपतन-रहित
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका कभी पतन या क्षय नहीं होता, जो स्थिर हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्थिरता
विस्तृत लाभ
स्थिरता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतक्लेशनाशाय
ॐ श्रीं ह्रीं सं सं ह्रीं श्रीं शङ्कर्षणाय ॐ
ॐ किशोरानन्ददायिन्यै नमः
ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमः
ॐ कदलीवनसुन्दर्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8