शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ दयात्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपदयालु आत्मा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका हृदय अपार दया और करुणा से निर्मित है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सौम्यता
विस्तृत लाभ
सौम्यता
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपायै स्वाहा मे पातु नाभिकाम्। (स्वरूप: विद्यास्वरूपा | लाभ: नाभि, मणिपूर चक्र और नाद के उद्गम स्थान 'पश्यन्ती' वाक् की रक्षा | अर्थ: विद्यास्वरूपा मेरी नाभि की रक्षा करें) 8
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥ दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः॥
ॐ सर्वनेत्रे नमः
ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः
ॐ कमलजायै नमः
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्