शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ द्विरूपभृते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनर-सिंह रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो एक साथ नर (मनुष्य) और सिंह का दोहरा रूप धारण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ
विस्तृत लाभ
द्वैत (संसार) और अद्वैत (ब्रह्म) के रहस्यमय दर्शन और ज्ञान की समझ।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
ॐ साधकोत्तमसर्वस्वायै नमः
ॐ पद्मनिलयायै नमः
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।