शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ कण्ठं मे पातु नृहरिर्भूभृदनन्तकोटनः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकण्ठ (गला) / नृहरि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संपूर्ण पृथ्वी को धारण करने वाले नृहरि मेरे कण्ठ की रक्षा करें। (श्वास व स्वर दोषों का निवारण)।
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