शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ प्रधान-पुरुषेश्वराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रकृति (प्रधान) और पुरुष के स्वामी
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्रकृति के त्रिगुणों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
प्रकृति के त्रिगुणों से मुक्ति 80
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ॐ साधकप्राणायै नमः
ॐ हासमुख्यै नमः