शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ प्रधान-पुरुषेश्वराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रकृति (प्रधान) और पुरुष के स्वामी
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्रकृति के त्रिगुणों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
प्रकृति के त्रिगुणों से मुक्ति 80
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
जामदग्न्यः परं यस्य दैवतं भृत्यवत्सलः। नित्यं परश्वधभृतः कवचस्यास्य धारणात्॥
गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः ॥
ॐ विद्यायै नमः
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥
अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम्। अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥