शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ऋतं सत्यं परं ब्रह्म पुरुषं कृष्णपिङ्गलम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपरम सत्य मंत्र
स्वरूपकृष्ण-पिंगल स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं उस परम सत्य, परब्रह्म, नीले और पीले वर्ण वाले सर्वव्यापी पुरुष को बारंबार प्रणाम करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सत्य की अनुभूति, मानसिक दृढ़ता और मोक्ष की ओर अग्रसर होना
विस्तृत लाभ
सत्य की अनुभूति, मानसिक दृढ़ता और मोक्ष की ओर अग्रसर होना 31।
जप काल
प्रातः काल स्तुति के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मदिराक्ष्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद सर्वसौभाग्यं देहि देहि स्वाहा।
खों खं खं फट् प्राण-ग्रासी प्राण-ग्रासी हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणां शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ कल्याण्यै नमः
वाक्च मे मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे...
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥ 18