शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 3
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हाथों में त्रिशूल, पाश और दंड धारण करने वाले निरोगी आदिदेव की वंदना करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
रोगों से मुक्ति (निरामयम्) और अस्त्र-शस्त्रों के भय का नाश
विस्तृत लाभ
रोगों से मुक्ति (निरामयम्) और अस्त्र-शस्त्रों के भय का नाश।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सिन्धुसागरसङ्गमाय नमः
ॐ उपेन्द्राय नमः
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मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा
नित्यलीलाप्रवेशं च ददाति श्रीव्रजाधिपः। अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवानां न विद्यते॥