शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सदानन्दमयी तारा
ॐ श्रीं ह्रीं ह्स्सौः हूँ फट् नील सरस्वत्यै स्वाहा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक हवन मन्त्र
स्वरूपनील सरस्वती
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीं (ऐश्वर्य), ह्रीं (शक्ति), ह्स्सौः (परावाक्), हूँ (अज्ञान-नाश) बीजों से युक्त नील सरस्वती को आहुति समर्पित है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान और तंत्र के सर्वोच्च रहस्यों का उद्घाटन
विस्तृत लाभ
ज्ञान और तंत्र के सर्वोच्च रहस्यों का उद्घाटन।
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ॐ त्रिवृत्ततनयाय नमः।
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करारविन्देन पदारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम् । वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि ॥