शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
महागणपति मूल मंत्र (28 अक्षर)
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक मूल मंत्र
स्वरूपमहागणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे वरदान देने वाले महागणपति, संपूर्ण जनमानस को मेरे अनुकूल (वशीभूत) करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संपूर्ण भौतिक ऐश्वर्य, राज-सम्मान, वशीकरण और त्रैलोक्य विजय
विस्तृत लाभ
संपूर्ण भौतिक ऐश्वर्य, राज-सम्मान, वशीकरण और त्रैलोक्य विजय।
जप काल
गुरु-दीक्षा के पश्चात, 4 लाख जप (पुरश्चरण) और तर्पण विधान 28।
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