शुक्लवर्ण ध्यान मंत्र
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् । प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने श्वेत वस्त्र धारण किए हैं, जिनका वर्ण चंद्रमा के समान है, जो चार भुजाओं वाले हैं और जिनका मुख प्रसन्न है, ऐसे देव का मैं विघ्नों की शांति के लिए ध्यान करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक शांति, अज्ञानता का शमन और संकटों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
मानसिक शांति, अज्ञानता का शमन और संकटों से मुक्ति।
जप काल
दैनिक पूजा से पूर्व इष्ट देवता के ध्यानार्थ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ निसर्गसमयाय नमः।
ॐ भर्गाय नमः
ॐ भूतकृते नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ पापनाशिन्यै नमः
ॐ कैलासवासिने नमः