शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
महा-दुर्गम संकटों का नाश और देवी दुर्गा के समान अजेय शक्ति
विस्तृत लाभ
महा-दुर्गम संकटों का नाश और देवी दुर्गा के समान अजेय शक्ति।
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