शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ उदारकीर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपयशस्वी रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी कीर्ति (यश) अत्यंत उदार, व्यापक और ब्रह्मांड में फैली है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाज में बेदाग यश, कीर्ति और उच्च कोटि के सम्मान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
समाज में बेदाग यश, कीर्ति और उच्च कोटि के सम्मान की प्राप्ति।
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ॐ कारणानन्दजापेष्टायै नमः
सुवर्णमालिकाञ्चितत्रिरेखकम्बुकण्ठगे त्रिसूत्रमङ्गलीगुणत्रिरत्नदीप्तिदीधिते। सलोलनीलकुन्तलप्रसूनगुच्छगुम्फिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ कामजनकाय नमः
यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च। सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु॥ 18
ॐ कवये नमः।
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्। तर्जनं यमदूतानां राम रामेति गर्जनम्॥