शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वेल् मुरुगन जयघोष
वेल् वेल् वेत्रिवेल् मुरुगनुक्कु अरोहरा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारविजय मंत्र
स्वरूपवेलायुधधारी मुरुगन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
विजय दिलाने वाले भाले (वेल्) को धारण करने वाले भगवान मुरुगन की जय हो।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संघर्षों में अदम्य साहस और अंतिम विजय
विस्तृत लाभ
संघर्षों में अदम्य साहस और अंतिम विजय।
जप काल
यात्रा से पूर्व या ताईपूसम पर सामूहिक उद्घोष।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः
ॐ विभावर्यै नमः
ॐ कमलाकरतोषितायै नमः
ॐ त्रिवृत्ततनयाय नमः।
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते॥
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥