शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ अध्यक्षरायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ॐकार (अक्षरों) की अधिष्ठात्री देवी।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाक्-सिद्धि और मंत्र-सिद्धि
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि और मंत्र-सिद्धि।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
वेल् वेल् वेत्रिवेल् मुरुगनुक्कु अरोहरा
ॐ धूम्रवर्णाय हुं
ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ कर्बूराक्षरायै नमः