बजरंगबली, मारुति
210 मंत्रॐ रुद्रावीर्यसमुद्भवाय नमः
ॐ वाग्मिने नमः
ॐ दृढव्रताय नमः
ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय नमः
ॐ दान्ताय नमः
ॐ शान्ताय नमः
ॐ प्रसन्नात्मने नमः
ॐ शतकान्ठमदापहर्त्रे नमः
ॐ योगिने नमः
ॐ रामकथालोलाय नमः
ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय नमः
ॐ वज्रद्रंष्ट्राय नमः
ॐ वज्रनखाय नमः
ॐ शुचये नमः
ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः
ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने नमः
ॐ शरपञ्जरभेदकाय नमः
ॐ दशबाहवे नमः
ॐ लोकपूज्याय नमः
ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः
ॐ सीतारामपादुकासेवायै नमः
ॐ निरामयाय नमः
ॐ अरोगकर्त्रे नमः
ॐ विश्वेशाय नमः
ॐ विश्वनाथाय नमः
ॐ हरीश्वराय नमः
ॐ वार्धौमैनाकपूजिताय नमः
ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय नमः
ॐ गन्धमादनशैलस्थाय नमः
ॐ लङ्कापुरविदाहकाय नमः
ॐ सुग्रीवसचिवाय नमः
ॐ धीराय नमः
ॐ शूराय नमः
ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः
ॐ सुरार्चिताय नमः
ॐ महातेजसे नमः
ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः
ॐ कामरूपिणे नमः
ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः
ॐ भर्गाय नमः
ॐ कबलीकृतमार्तण्डमण्डलाय नमः
ॐ विजितेन्द्रियाय नमः
ॐ रामसुग्रीवसन्धात्रे नमः
ॐ महारावणमर्धनाय नमः
ॐ स्फटिकाभाय नमः
ॐ वागधीशाय नमः
ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः
ॐ चतुर्बाहवे नमः
ॐ दीनबन्धवे नमः
ॐ महात्मने नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
ॐ सञ्जीवननगाहर्त्रे नमः
ॐ भगवते नमः
ॐ मुनये नमः
ॐ वरदाय नमः
ॐ शिवय नमः
ॐ सर्वस्मै नमः
ॐ परस्मै नमः
ॐ अव्यक्ताय नमः
ॐ रसाधराय नमः
ॐ पिङ्गकेशाय नमः
ॐ पिङ्गरोम्णे नमः
ॐ श्रुतिगम्याय नमः
ॐ सनातनाय नमः
ॐ अनादये नमः
ॐ निधिपतये नमः
ॐ देवाय नमः
ॐ विश्वहेतवे नमः
ॐ विश्वहराय नमः
ॐ नित्यायुक्ताय नमः
ॐ भक्ताकाराय नमः
ॐ जगद्रथाय नमः
ॐ प्रलयाय नमः
ॐ मायानर्जितरक्षसे नमः
ॐ महेशकृतसंस्तवाय नमः
ॐ सत्यसन्धाय नमः
ॐ शरभाय नमः
ॐ कलिपावनाय नमः
ॐ सुखप्रदाय नमः
ॐ कल्याणप्रकृतये नमः
ॐ स्थिराय नमः
ॐ विश्वम्भराय नमः
ॐ विश्वमूर्तये नमः
ॐ विश्वाकाराय नमः
ॐ रवये नमः
ॐ अमितमायाय नमः
ॐ मायातीताय नमः
ॐ विमत्सराय नमः
ॐ मायाश्रयाय नमः
ॐ निर्लेपाय नमः
ॐ सुखिने नमः
ॐ श्रीमते नमः
ॐ नागाय नमः
ॐ रसाय नमः
ॐ रुद्राय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ अजराय नमः
ॐ अमृत्यवे नमः
ॐ वीरवीराय नमः
ॐ ग्रामवासाय नमः
ॐ ज्ञानाश्रयाय नमः
ॐ धनदाय नमः
ॐ निर्गुणाय नमः
ॐ अकायाय नमः
ॐ सर्वग्रहविनाशिने नमः
ॐ सीतादेवीमुद्राप्रदायकाय नमः
ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः
ॐ सर्वमायाविभञ्जनाय नमः
ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः
ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः
ॐ परविद्यापरिहाराय नमः
ॐ परशौर्यविनाशनाय नमः
ॐ परमन्त्रनिराकर्त्रे नमः
ॐ परयन्त्रप्रभेदकाय नमः
ॐ तत्त्वज्ञानप्रदाय नमः
ॐ भीमसेनसहायकृते नमः
ॐ सर्वदुःखहराय नमः
ॐ सर्वलोकचारिणे नमः
ॐ मनोजवाय नमः
ॐ पारिजातद्रुमूलस्थाय नमः
ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते नमः
ॐ सर्वतन्त्रस्वरूपिणे नमः
ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः
ॐ नमो बजर का कोठा, जिस पर पिंड हमारा पेठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों धाम का यती हनुमंत रखवाला।
आवत हियँ हरषीं नहिं नैनन्हि नहिं सनेह। तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु। भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु॥
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ नमो आदेश गुरु को, सोने का कड़ा, तांबे का कड़ा, हनुमान वनगरेया सजे मोंढे आन खड़ा। शब्द सांचा पिंड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ लङ्किनीभञ्जनाय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ नमो हनुमते महारुद्र अवताराय भूत प्रेत डाकिनी शाकिनी किल किल मारी मारी भैरव किल मसान किल मली किल चुड़ैल किल दैत्य किल ब्रह्म राक्षस किल... चल रे चल महा हनुमंते।
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ आञ्जनेयाय नमः
ॐ महावीराय नमः
ॐ हनूमते नमः
ॐ मारुतात्मजाय नमः
ॐ वज्रकायाय नमः
ॐ वानराय नमः
ॐ केसरिसुताय नमः
ॐ सीताशोकनिवारणाय नमः
ॐ अञ्जनागर्भसम्भूताय नमः
ॐ बालार्कसदृशाननाय नमः
ॐ विभीषणप्रियकराय नमः
ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय नमः
ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः
ॐ महाकायाय नमः
ॐ महाद्युतये नमः
ॐ चिरञ्जीविने नमः
ॐ रामभक्ताय नमः
ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमः
ॐ अक्षहन्त्रे नमः
ॐ काञ्चनाभाय नमः
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः
ॐ महातपसे नमः
ॐ रामदूताय नमः
ॐ कपीश्वराय नमः
ॐ सर्वरोगहराय नमः
ॐ प्रभवे नमः
ॐ बलसिद्धिकराय नमः
ॐ प्रतापवते नमः
ॐ सर्वविद्यासम्पत्प्रदायकाय नमः
ॐ कपिसेनानायकाय नमः
ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः
ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमः
ॐ चञ्चलद्वालसन्नद्धलम्बमानशिखोज्ज्वलाय नमः
ॐ गन्धर्वविद्यातत्त्वज्ञाय नमः
ॐ महाबलपराक्रमाय नमः
ॐ कारागृहविमोक्त्रे नमः
ॐ शृङ्खलाबन्धमोचकाय नमः
ॐ सागरोत्तारकाय नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमः
पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवीर्यं श्रीशंखचक्ररमणीयभुजाग्रदेशम्। पीताम्बरं मकरकुण्डलनूपुराङ्गं ध्यायेतितं कपिवरं हृदि भावयामि॥
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्व मुखे। हयग्रीवाय सकल जन वशीकरणाय स्वाहा॥
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय उत्तर मुखे। आदि वराहाय सकल संपत्कराय स्वाहा॥
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पश्चिम मुखे। गरुडाय सकल विष हरणाय स्वाहा॥
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय दक्षिण मुखे। कराल वदनाय नरसिंहाय सकल भूत प्रेत प्रमथनाय स्वाहा॥
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्व कपि मुखे। सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा॥
ॐ श्री वज्रदेहाय रामभक्ताय वायुपुत्राय नमोऽस्तुते॥
ॐ ऐं भ्रीं हनुमते, श्री राम दूताय नमः॥
ॐ श्री हनुमते नमः॥
ॐ ह्स्फ्रेँ ख्फ्रेँ ह्स्रौँ ह्स्ख्फ्रेँ ह्सौँ हनुमते नमः॥
ॐ महाबलाय वीराय चिरंजीविने उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये॥
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
ॐ हुं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥
यँ यँ हनुमते फल फक्रिया हौत धग् धग् आयुरस्व प ख हेति फट्॥
ॐ नमो भगवते आञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा॥
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः इति दिग्बन्धः॥
ॐ स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् वम् राम् वा ह्रौम् ह्रीम् राम् स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् क्षीम् क्षौम् धुम् हम् ह्लौम् ह्रीम् राम्॥
ॐ हनुमते नमः
ॐ अञ्जनीसुताय नमः
ॐ वायुपुत्राय नमः
ॐ महाबलाय नमः
ॐ रामेष्टाय नमः
ॐ फाल्गुनसखाय नमः
ॐ पिङ्गाक्षाय नमः
ॐ उदधिक्रमणाय नमः
ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः
ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः
ॐ दशग्रीवदर्पघ्नाय नमः
ॐ अमितविक्रमाय नमः
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः। राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥ दासोऽहं कोसलेन्द्रस्य रामस्याक्लिष्टकर्मणः। हनुमान् शत्रुसैन्यानां निहन्ता मारुतात्मजः॥