शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भूत-प्रेत एवं अज्ञान नाशक मंत्र
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारभय/प्रेत नाशक एवं ज्ञान-प्रदाता संपुट
स्वरूपग्यान घन (ज्ञान के भंडार) हनुमान
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं उन पवनकुमार को प्रणाम करता हूँ जो दुष्टों रूपी वन को भस्म करने के लिए अग्नि के समान हैं और ज्ञान की घनघोर घटा हैं; जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष-बाण धारण किए हुए श्री राम निवास करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दुष्ट शक्तियों, भूत-प्रेत, मानसिक भय से मुक्ति और अज्ञान के अंधकार का नाश
विस्तृत लाभ
दुष्ट शक्तियों, भूत-प्रेत, मानसिक भय से मुक्ति और अज्ञान के अंधकार का नाश 19।
जप काल
रात्रिकाल में भय लगने पर 108 बार।
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