शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपभावी ब्रह्मा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो भविष्य के कल्प में चतुरानन (ब्रह्मा) का पद ग्रहण करेंगे, उन्हें नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ब्रह्मवन्दिताय नमः
ॐ प्रकृत्यै नमः
ॐ शब्दब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
ॐ क्लीं ऐं नमो भगवते रघुनन्दनाय रक्षोघ्न विषधाय मधुरप्रसन्न-वदनाय अमिततेजसे बलाय रामाय विष्णवे नमः क्लीं ऐं ॐ
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥ 18
ॐ क्ष्रौम् भगवते नरसिंहाय नमः