शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ विजितेन्द्रियाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजितेन्द्रिय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अपनी समस्त इंद्रियों (काम, क्रोध, लोभ आदि) पर पूर्ण विजय प्राप्त करने वाले।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम्। सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विष्ण्विन्द्रादिदेवात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः
ॐ द्वैमातुराय नमः
ॐ पञ्चाननाय नमः