हनुमान मंत्र
ॐ सुरार्चिताय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
इन्द्र, ब्रह्मा, शिव आदि समस्त देवताओं द्वारा पूजे जाने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ज्ञानशक्तिधरः स्कन्दः वल्लीकल्याणसुन्दरः । देवसेनामनःकान्तः कार्तिकेयो नमोऽस्तु ते ॥
ॐ तत्सत् भूर्भुवः स्वः तस्मै परब्रह्मणे नमः (गोपाल-तापनी में विभिन्न वर्णनों के साथ प्रयुक्त)
वेदस्य म आणीस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधाम्यृतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये द्वादशादित्याः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सर्वाद्यायै नमः
क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥