शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री हनुमत् गायत्री मंत्र
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारगायत्री मंत्र (Gayatri Mantra)
स्वरूपआंजनेय / वायुपुत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम माता अंजना के पुत्र को जानते हैं, उन वायुपुत्र का हम ध्यान करते हैं। वे भगवान हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान और अंधकार का नाश, आत्म-बल में वृद्धि, अष्टसिद्धि (अणिमा, महिमा आदि) की प्राप्ति और बौद्धिक कुशाग्रता
विस्तृत लाभ
अज्ञान और अंधकार का नाश, आत्म-बल में वृद्धि, अष्टसिद्धि (अणिमा, महिमा आदि) की प्राप्ति और बौद्धिक कुशाग्रता 25।
जप काल
प्रातःकाल सूर्योदय के समय, सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात मानसिक जप।
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