श्री हनुमद् बडवानल अस्त्र मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे महावीरों के वीर, सभी दुखों का निवारण करने वाले! आप समस्त भूत-मण्डलों, पिशाच-मण्डलों और हर प्रकार के ज्वर (एक दिन, दो दिन या चार दिन वाले) का छेदन करें और समस्त ब्रह्मराक्षसों का उच्चाटन करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर ज्वर (Fever), असाध्य बीमारियों, नवग्रहों के कुप्रभाव, और डाकिनी-शाकिनी जैसे तांत्रिक मारण प्रयोगों का जड़ से उच्चाटन
विस्तृत लाभ
भयंकर ज्वर (Fever), असाध्य बीमारियों, नवग्रहों के कुप्रभाव, और डाकिनी-शाकिनी जैसे तांत्रिक मारण प्रयोगों का जड़ से उच्चाटन 16।
जप काल
अत्यंत संकट की स्थिति में ही इसका अनुष्ठान किया जाता है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र