शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ ब्रह्मप्रकाशकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपज्ञान प्रदाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने शिष्यों को ब्रह्मज्ञान का दिव्य प्रकाश देते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्म-साक्षात्कार
विस्तृत लाभ
आत्म-साक्षात्कार
जप काल
ध्यान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम् ॥
ह्रीं हरिहरपुत्राय पुत्र लाभाय शत्रुनाशाय मदगजवाहनाय महाशास्तये नमः।
ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये त्रिलोकात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ वेदत्रयप्रपूज्याय नमः