हनुमान मंत्र
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *
इस मंत्र से क्या होगा?
जो मनुष्य तीनों संध्याओं में इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य का पुण्यफल प्राप्त होता है
विस्तृत लाभ
जो मनुष्य तीनों संध्याओं में इन 12 नामों का पाठ करता है, उसे आयु, आरोग्य और ऐश्वर्य का पुण्यफल प्राप्त होता है 42।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ महासम्पदप्रदायिने नमः।
ॐ कुमारब्रह्मचारिणे नमः
ॐ ऐं क्लीं सौः।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये नित्यानन्दस्वरूपः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः