हनुमान मंत्र
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र से क्या होगा?
ॐ, श्रीं, ह्रीं—इन तीन बीजाक्षरों के प्रभाव से जीवन में स्थिरता और मोद
विस्तृत लाभ
ॐ, श्रीं, ह्रीं—इन तीन बीजाक्षरों के प्रभाव से जीवन में स्थिरता और मोद।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् वम् राम् वा ह्रौम् ह्रीम् राम् स्फेम् क्रौम् क्षौम् ग्लौम् क्षीम् क्षौम् धुम् हम् ह्लौम् ह्रीम् राम्॥
वाक्च मे मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे...
ॐ अनघायै नमः
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
ॐ शत्रुदर्पघ्नाय नमः
श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥