शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा सप्ताक्षर मंत्र (स्वाहा युक्त)
ॐ ह्रीं श्री राधायै स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआहुति/यज्ञ एवं जप मंत्र
स्वरूपश्री राधा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ह्रीं बीज रूप श्री राधा के चरणों में मेरा आहुति रूपी सर्वस्व समर्पण है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संकटों से रक्षा, मानसिक स्थिरता और पूर्ण भौतिक कल्याण
विस्तृत लाभ
संकटों से रक्षा, मानसिक स्थिरता और पूर्ण भौतिक कल्याण 11।
जप काल
हवन (यज्ञ) के समय आहुति हेतु या नित्य मानसिक उपासना में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
घ्राणं पातु महालक्ष्मीः कण्ठं पातु सरस्वती। भुजौ तु पातु वरदा हृदय पातु सुन्दरी॥
कृपां कुरु जगन्मातर्मामेवं हततेजसम्। गुरुशापात्स्मृतिभ्रष्टं विद्याहीनं च दुःखितम्॥
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ॐ नारसिंहाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अमृतं तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कामिने नमः