शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ जगद्व्यापिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसर्वव्यापक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो इस पूरे ब्रह्मांड के अणु-अणु में व्याप्त हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
किसी भी जीव से घृणा न करने का भाव
02
संकीर्णताओं से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
किसी भी जीव से घृणा न करने का भाव; संकीर्णताओं से पूर्ण मुक्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अनन्तरूपिण्यै राधायै नमः
ॐ अग्निजन्मने नमः
ॐ हरिवल्लभायै नमः
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ महीभर्त्रे नमः
ॐ योगिनीपतये नमः।