शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ कण्ठं मे पातु नृहरिर्भूभृदनन्तकोटनः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकण्ठ (गला) / नृहरि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संपूर्ण पृथ्वी को धारण करने वाले नृहरि मेरे कण्ठ की रक्षा करें। (श्वास व स्वर दोषों का निवारण)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वेदगर्भाय नमः
ॐ कृषाणवे नमः
कैलासशिखरे रम्ये शंकरं लोकशंकरम्। पार्वत्युवाच- त्वत्तः श्रुतान्यशेषाणि जामदग्न्यस्य साम्प्रतम्॥
ॐ त्रैलोक्यवन्ध्याय नमः।
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥
ॐ सर्वशास्त्रवासिन्यै स्वाहैशान्यां सदाऽवतु। (अर्थ: सभी शास्त्रों में बसने वाली देवी ईशान कोण में रक्षा करें) 8