शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ करञ्जमालाभरणायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम स्तोत्र मंत्र (दशमहाविद्या)
स्वरूपदशमहाविद्या काली / करालवदना काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
करंज के पुष्पों या बीजों की माला पहनने वाली।
जप काल
देवी की मूर्ति, यंत्र या चित्र के सम्मुख 'ककारादि सहस्रार्चन' विधि द्वारा।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
पवन तनय बल पवन समाना। (यह हनुमान जी की शक्ति का आह्वान कर न्याय प्राप्त करने हेतु है)।
ॐ सत्यसन्धाय नमः
ॐ जगच्चक्राय स्वाहा – शिखायै वषट्