हनुमान मंत्र
ॐ क्लीं ॐ श्रीं विजय लक्ष्म्यै नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सर्वत्र विजय दिलाने वाली विजय-लक्ष्मी को नमस्कार।
इस मंत्र से क्या होगा?
मुकदमों में जीत, प्रतिस्पर्धा में विजय, सकारात्मकता
विस्तृत लाभ
मुकदमों में जीत, प्रतिस्पर्धा में विजय, सकारात्मकता 12।
जप काल
किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या परीक्षा में जाने से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।
ॐ चक्रपाणये नमः
ॐ वासुदेवाय नमः