हनुमान मंत्र
ॐ कृष्णप्राणाधिकायै राधायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो कृष्ण को उनके प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रभु की विशेष कृपा का अनुभव
विस्तृत लाभ
प्रभु की विशेष कृपा का अनुभव।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वलोकानां गुरवे नमः।
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।
ॐ दुराराध्याय नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ कच्छपेशाय विद्महे महाकूर्माय धीमहि तन्नो कूर्मः प्रचोदयात्।