परशुराम अष्टकम् (श्लोक 7)
मार्गणाशोषिताभ्ध्यंशं पावनं चिरजीवनम्। य एतानि जपेन्द्रामनामानि स कृती भवेत्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने अपने तीक्ष्ण बाणों (मार्गण) से समुद्र के जल को सोख लिया (पीछे धकेल कर भूमि प्रकट की), जो परम पावन और चिरंजीवी हैं। जो कोई भी भार्गव राम के इन नामों का जप करता है, वह कृतार्थ (सफल) हो जाता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
परम पवित्रता, जीवन में चिरंजीवी ऊर्जा का संचार और समस्त कार्यों में पूर्ण सफलता
विस्तृत लाभ
परम पवित्रता, जीवन में चिरंजीवी ऊर्जा का संचार और समस्त कार्यों में पूर्ण सफलता।
जप काल
अष्टक पाठ के अंत में फलश्रुति के रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥
ॐ हींकार्यै नमः
ॐ शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटं अमृतोद्भवा। चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरम्बुजा॥
ॐ भूपतये नमः
ॐ पीतवाससे नमः
ॐ धातुरुत्तमाय नमः