शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
मृणालवालवल्लरी तरङ्गरङ्गदोर्लते लताग्रलास्यलोलनीललोचनावलोकने। ललल्लुलन्मलन्मनोज्ञमुग्धमोहनाश्रिते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-कटाक्ष/स्तोत्र मंत्र।
स्वरूपमुग्ध-मोहनाश्रिते (मोहन की आश्रिता)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कमलनाल के समान भुजाओं वाली, चंचल नीले नेत्रों वाली और मुग्धकारी मोहन (कृष्ण) की आश्रिता हे राधे, मेरी ओर कृपादृष्टि करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
लाभ: चंचल मन की स्थिरता
विस्तृत लाभ
लाभ: चंचल मन की स्थिरता।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
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