शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ नमो वज्रनखाय च
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनख रक्षा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वज्रनख को मेरा नमस्कार।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
ॐ महाकालाय नमः
श्रियमाक्रष्टुकामानामिदं कवचमुत्तमम्। स जामदग्न्यकवचं नित्यमावर्तयेन्नरः॥
ॐ गद्यपद्यवासिन्यै स्वाहा मामुत्तरेऽवतु। (अर्थ: गद्य-पद्य में निवास करने वाली देवी उत्तर में रक्षा करें) 8
ॐ महानन्दिने नमः