शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ परमधाम्ने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरम पद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो मोक्ष-धाम (वैकुंठ) के साक्षात् स्वरूप हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मृत्यु के पश्चात् जन्म-मरण के चक्र से छूटकर वैकुंठ धाम (मोक्ष) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मृत्यु के पश्चात् जन्म-मरण के चक्र से छूटकर वैकुंठ धाम (मोक्ष) की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम् । ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम् ॥
ॐ उच्छिष्टगणपति देवतायै नमो हृदि।
ॐ प्रियाय नमः
ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै महालक्ष्म्यै एह्येहि सर्वसौभाग्यं देहि मे स्वाहा।
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ कृष्णप्रेमतरङ्गिण्यै नमः