शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
महामारी एवं रोग-शोक नाश मंत्र
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआरोग्य एवं रक्षा मंत्र
स्वरूपमहामाया
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रसन्न होने पर आप सभी रोगों को नष्ट कर देती हैं और रुष्ट होने पर सभी मनचाही कामनाओं को। जो आपकी शरण में हैं, उन पर विपत्ति नहीं आती, बल्कि वे अन्यों को आश्रय देने वाले बन जाते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
गंभीर बीमारियों, महामारियों और शारीरिक-मानसिक कष्टों से त्वरित मुक्ति
विस्तृत लाभ
गंभीर बीमारियों, महामारियों और शारीरिक-मानसिक कष्टों से त्वरित मुक्ति 32।
जप काल
रोगी के सिरहाने बैठकर या जल को अभिमंत्रित कर पिलाने की विधि।
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