सद्योजात मंत्र (पश्चिम मुख)
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
मैं सद्योजात (नवोत्पन्न) की शरण में हूँ। सद्योजात को मेरा बारंबार नमन। हे भगवान! मुझे जन्म-जन्मांतर के संसार-चक्र से मुक्त करें और मोक्ष प्रदान करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
नवजीवन, नवीन कार्यों में सफलता, और जन्म-मरण के चक्र (संसार) से मोक्ष की लालसा की जागृति
विस्तृत लाभ
नवजीवन, नवीन कार्यों में सफलता, और जन्म-मरण के चक्र (संसार) से मोक्ष की लालसा की जागृति 21।
जप काल
पश्चिम दिशा की ओर मुख करके।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ प्रहर्त्रे नमः
सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु। भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु॥
ॐ नारायणाय नमः (पाञ्चरात्र दीक्षा)
ॐ विश्वनेत्रे नमः
ॐ श्रियै नमः
अनन्तकोटिविष्णुलोकनम्रपद्मजार्चिते हिमाद्रिजापुलोमजाविरिञ्चिजावरप्रदे। अपारसिद्धिरिद्धिदिग्दिगन्तकीर्तिदिगधमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥