शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ समुद्रतनयायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समुद्र की पुत्री (क्षीरसागर मंथन से प्रकट) को नमन।
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ॐ योगहृत्पद्मनिलयायै नमः
ॐ ज्वालामालिने नमः
ॐ वृषभानुसुता दन्तान् पातु।
ॐ वज्रहस्ताय नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ कमलायै नमः