बाधा निवारण (शत्रुघ्न) मंत्र
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे तीनों लोकों की अखिलेश्वरी! आप हमारी सभी बाधाओं को शांत करें और इसी प्रकार हमारे वैरी (शत्रुओं) का विनाश करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन की सभी बाधाओं का नाश, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का शमन और मुकदमों में विजय
विस्तृत लाभ
जीवन की सभी बाधाओं का नाश, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं का शमन और मुकदमों में विजय 17।
जप काल
मंगलवार या अष्टमी के दिन देवी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विष्ण्विन्द्रादिदेवात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
अधः
ॐ विभावर्यै नमः