ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

हनुमान मंत्र

ॐ सर्वाद्यायै नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनाम-मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो सभी की आदि कारण (मूल प्रकृति) हैं।

जप काल

तुलसी माला पर जप।

टिप्पणी

साधना की दृष्टि से इन नामों को ॐ और 'नमः' या 'स्वाहा' के सम्पुट के साथ जपा जाता है।

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अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8

दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयूथपारिः। विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः॥

ॐ कमलायै नमः

पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।

ॐ कमनीयगुणाराध्यायै नमः

ॐ कृत्तिकासूनवे नमः