शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ सर्वकर्मणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसर्व-कर्ता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सृष्टि के समस्त कर्मों के मूल प्रेरक और कर्ता हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कर्मों में सफलता
विस्तृत लाभ
कर्मों में सफलता
जप काल
कार्य आरंभ
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ विश्वम्भराय नमः
ॐ वकाररूपाय नमः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ नमो असितांग भैरवाय स्वाहा।
ॐ अक्षराय नमः
पवन तनय बल पवन समाना। (यह हनुमान जी की शक्ति का आह्वान कर न्याय प्राप्त करने हेतु है)।