सर्वस्वरूप रक्षा महामंत्र
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी और सभी शक्तियों से सम्पन्न देवी! आप सब प्रकार के भयों से हमारी रक्षा करें, आपको नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञात भयों से रक्षा, घोर संकटों से बचाव, आत्मविश्वास में वृद्धि और पूर्ण सुरक्षा
विस्तृत लाभ
अज्ञात भयों से रक्षा, घोर संकटों से बचाव, आत्मविश्वास में वृद्धि और पूर्ण सुरक्षा 32।
जप काल
विपत्ति के समय 108 बार त्वरित जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
ॐ क्रूराय नमः
ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः
ॐ कदलीहोमसन्तुष्टायै नमः
नित्यलीलाप्रवेशं च ददाति श्रीव्रजाधिपः। अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवानां न विद्यते॥