ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

हनुमान मंत्र

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारविष्णु वंदना / ध्यान श्लोक
स्वरूपशेषशायी विष्णु
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जिनका स्वरूप शांत है, जो शेषनाग पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, और जो देवताओं के स्वामी हैं, उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मन की असीम शांति, सांसारिक भय (भव-भय) से मुक्ति और एकाग्रता

विस्तृत लाभ

मन की असीम शांति, सांसारिक भय (भव-भय) से मुक्ति और एकाग्रता 10।

जप काल

पूजा के आरंभ में भगवान के स्वरूप का मानसिक ध्यान करते हुए।

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