शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वैदिक रक्षा मंत्र
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच मंत्र
स्वरूपसर्व-रक्षक राम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राघव मेरे सिर की रक्षा करें, और दशरथपुत्र मेरे मस्तक की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शारीरिक सुरक्षा और व्याधियों से रक्षा
विस्तृत लाभ
शारीरिक सुरक्षा और व्याधियों से रक्षा।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अभयवरदहस्तः पाशदन्ताक्षमाला सृणिपरशुदधानो मुद्गरं मोदकं च । फलमधिगत सिंहः पञ्चमातङ्गवक्त्रो गणपतिरतिगौरः पातु हेरम्बनामः ॥
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
ॐ नारायणाय नमः
ॐ सर्वज्ञाय नमः
ॐ भव्याय नमः
न च प्राणसंज्ञो न वै पंचवायुः... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥