शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ सँ कम् रम् सँ रम् हुं फट् सहस्रार हुं फट्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपबीजाक्षर अस्त्र मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'सम्', 'कम्', 'रम्' आदि सुदर्शन के तांत्रिक बीज हैं। यह मंत्र नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर साधक के इर्द-गिर्द अग्नि-प्राचीर बनाता है।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ रत्नसिंहासनस्थाय नमः।
ॐ योगबद्धायै नमः
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः ॐ देवलक्ष्म्यै नमः ॐ सर्वोपद्रवनिवारिण्यै नमः।
ॐ अदीनाय नमः
विष्णवे जिष्णवे महाविष्णवे प्रविष्णवे महेश्वराय