शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ सुप्रसन्नायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सदैव अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में रहती हैं, उन्हें नमन 16।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सौम्याय नमः
भयार्तस्वजनत्राणतत्परं धर्मतत्परम्। गतगर्वप्रियं शूरं जमदग्निसुतुं मतम्॥
वेताल शक्ति शर कार्मुक चक्र खट्वाङ्ग मुद्गर गदाम् अङ्कुश नागपाशान् । शूलं च कुन्तं परशुं ध्वजमुद्वहन्तं वीरं गणेशमरुणं सततं स्मरामि ॥
ॐ सर्वस्मै नमः
ॐ सत्यज्ञानायै नमः
ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8