उत स्या नः सरस्वती
उत स्या नः सरस्वती घोरा हिरण्यवर्तनिः। वृत्रघ्नी वष्टि सुष्टुतिम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
स्वर्ण रूपी मार्ग वाली, शत्रुओं (वृत्र) का नाश करने वाली, उग्र स्वरूप वाली वह सरस्वती हमारी सुंदर स्तुति की कामना करती हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
विद्या प्राप्ति में आने वाली भयंकर बाधाओं का नाश, एकाग्रता की रक्षा
विस्तृत लाभ
विद्या प्राप्ति में आने वाली भयंकर बाधाओं का नाश, एकाग्रता की रक्षा।
जप काल
ज्ञान के मार्ग में अवरोध आने पर मानसिक जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वासुदेवाय नमः
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
ॐ राक्षसामरगन्धर्वकोटिकोट्यभिवन्दिताय नमः
ॐ श्रीं क्लीं श्रीं नमः॥
ॐ अनेकनेत्राय नमः।
ॐ स्मितवक्त्राय नमः