शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ वीर्यवते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअसीम पराक्रमी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अनंत शक्ति, वीर्य और अदम्य साहस से परिपूर्ण हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ऊर्जा
विस्तृत लाभ
ऊर्जा
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ दीप्तायै नमः
ॐ फालनेत्रसुताय नमः
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ उत्तरां हरिता पातु।
ॐ अष्टमूर्तये नमः