देवी सूक्त मंत्र - 8
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सम्पूर्ण लोकों का निर्माण करती हुई मैं वायु के समान स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होती हूँ। मैं अपनी महिमा से द्युलोक और इस पृथ्वी के भी परे अनंत विस्तार वाली हूँ 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥
ॐ सर्वस्मै नमः
ॐ सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: सर्ववर्णात्मिका | लाभ: दोनों पैरों की रक्षा | अर्थ: समस्त अक्षर-स्वरूपा देवी मेरे पैरों की रक्षा करें) 8
ॐ नमो नारसिंहाय
जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं। सुख संपति नाना बिधि पावहिं॥
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानन्द श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द